धर्म
मेरी समझ में तो एक ही धर्म है और वो हे मानव धर्म क्योंकि धर्म ने हमे पैदा नहीं किया धर्म को मानव ने पैदा किया है जरा हज़ारों वर्षों पूर्व एक झलक सोचो जब ये धरती पर सभी के पूर्वज एक आदिमानव रहे हैं तब कोई बता नहीं सकता कि आदिमानव का क्या धर्म था. वो जो मिले वो खाते, ना घर ना कोई मंदिर ना मस्जिद ना ही चर्च तब वो सभी एक आदिमानव ही थे. अतः आदिमानव धर्म भले ही ना हो पर आदि +मानव को देखो तो आदि काल से मानव ही है हम अतः मानव धर्म हे और यह मानवता के बगैर हो नहीं सकता. यदपी जहा तक भगवान का सवाल है तो वह सवाल ही रहेगा बड़े बड़े संत महात्मा कह गए हैं कि हर जीव मे शिव हे जीव सेवा ही शिव की सेवा हे अतः जो भी इश्वर है वो हमारे भीतर ही है और कहीं नहीं. इस लिए खुद को जानो अंदर ढूंढो बाहर नहीं. हिंदू, मुस्लिम, शिख, ईसाई, जो भी धर्म हे वो सभी एक ही मंजिल पर जाने वाली अलग अलग रास्ते हे. उससे ज्यादा कुछ नहीं.
🕉 नमः शिवाय
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